एक खत्म कीजिए दूसरी शुरु कीजिए

इंसान की जिंदगी कई बार अजीब सी उलझनों में घिर जाती है। समझ में नहीं आता कि करें तो क्या करें। ऐसे में मेरा सुझाव है कि एक मिनट के लिए आपको सोचना चाहिए। सोचें कि आपके जीवन में कम से कम एक गैरजरूरी चीज कौन सी है और उसे आज ही खत्म कर डालें। खत्म करने से मेरा मतलब यह नहीं है कि आप अपने बॉस, सास या पड़ोसी को खत्म करने के बारे में सोचने लगें। आपको खुद से संबंधित किसी चीज को नष्ट करना है, जो आपके जीवन के लिए जरूरी नहीं है।

मैं आपको समझाता हूं…‘मैं आज से लालच नहीं करूंगा। अपने गुस्से को खत्म कर दूंगा’ जैसी बातें आम तौर पर यूं ही बोली जाती हैं। पर इन्हें बिरले ही खत्म कर पाते हैं। और इसे आप सिर्फ निश्चय से हासिल नहीं कर सकते, इसके लिए जागरूकता की जरूरत होती है। किसी एक चीज के बारे में सोचिए, जिसके बिना आपका जीवन बेहतर होगा। और जिसके बारे में आप आज एक ठोस कदम उठाएंगे, चाहे वह कितनी भी छोटी बात हो। किसी छोटी सी चीज को लेकर तय कर लें कि अब चाहे जो हो जाए, आप वह काम नहीं करेंगे। ‘मैं अब गुस्सा नहीं करूंगा’ यह बात झूठ होगी क्योंकि गुस्सा करना या न करना अब तक आपके काबू में नहीं है, मगर आप ऐसा कुछ सोच सकते हैं कि ‘मैं गलत शब्द नहीं बोलूंगा। और इस पर पूरी तरह अमल करने की कोशिश करें।

अब इस का दूसरा पहलू। एक चीज को खत्म कर देने के बाद उसकी पूर्ति एक चीज शुरु करें। जीवन को ध्यान से देखकर यह तय करें कि उसमें कौन सी चीज बदली जा सकती है और फिर इस बारे में कोशिश कीजिए। ऐसी चीजों पर अफसोस करना, जिन्हें आप बदल नहीं सकते। दरअसल यथास्थिति बरकरार रखने की एक तरकीब होती है। महीने में कम से कम एक बार, हर पूर्णिमा के दिन, पूरी जागरूकता के साथ खुद से संबंधित किसी छोटी सी चीज के बारे में सोचें, जिसे आप बदलना चाहते हों। मसलन ऑफिस जाते समय मैं ईश्वर को याद करके निकलूंगा। या फिर आज मैं किसी एक जरुरतमंद की मदद करुंगा। ये छोटी-छोटी चीजें आपके जीवन को बदल देंगी और आपको एक अलग शख्सियत प्रदान करेंगी।