भस्मासुर आज भी जिंदा है

भस्मासुर आज भी जिंदा है! आप जानना चाहेंगे, कैसे ? आइए जरा वर्तमान विश्व के राजनैतिक उथल पुथल को परखें। अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच आपसी तनाव चरम पर है। वैसे उनके बीच यह अदावत पुरानी ही है, लेकिन इस बार लोहा गरम लगता है। इस बात के संकेत मिले हैं कि उत्तर कोरिया, फिर से किसी परमाणु परीक्षण की तैयारी में है । अमेरीका, अपनी खुफिया एजेंसियों से मिली रिपोर्टों से,  तनाव में हैं। जबकि इस मामले पर रुस और चीन जैसी बड़ी महाशक्तियां मौन साधे हुए हैं। गरमा गरमी के इस माहौल में राजनैतिक रुप से रुस और चीन दोनों का स्टैंड यह है कि वह उत्तर कोरिया के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ हैं।



रूस और चीन के ऐसे बर्ताव से अमेरिका को परेशानी हो गई है।लेकिन इसके पीछे इन दोनों देशों की कूटनीतिक और रणनीतिक चाल है। इसके पीछे की कहानी यह है कि  चीन और रूस दोनों ही बरसों से  उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को किसी ना किसी रुप में बढ़ावा देते रहे हैं। चीन और रुस दोनों ने ही वहां पर परमाणु रिएक्टरों के निर्माण में अहम भूमिका अदा की है। हालांकि रुस कहता आया है कि 1963 में उत्तर कोरिया ने उससे परमाणु हथियार बनाने के लिए उसकी मदद मांगी थी, लेकिन रुस ने मदद देने से मना कर दिया था। उत्तर कोरिया के परमाणु रिएक्टरों के निर्माण में रूस ने न सिर्फ  मुहैया करवाई बल्कि उत्तर कोरिया के वैज्ञानिकों को ट्रेनिंग भी दी थी। ऐसा ही कुछ चीन ने भी किया था। इन दोनों देशों की मदद से ही उत्तर कोरिया ने अपने शुरुआती परमाणु रिएक्टरों का विकास किया था।



अब शुरु होती है इस भस्मासुर के तपस्या की कहानी। उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों की जबर्दस्त कामना काफी पहले से है। साउथ कोरिया से प्रतियोगिता में यह देश कुछ भी कर गुजरने को तैयार होता है। ऐसे में उत्तर कोरिया ने अपना दबदबा बनाए रखने के लिए 1980 में उसने अपना परमाणु कार्यक्रम का रुख, परमाणु हथियारों के निर्माण की तरफ मोड़ दिया था। 2003 में उत्तर कोरिया ने परमाणु अप्रसार संधि से खुद को अलग कर लिया था। ताकि बेरोक टोक हो कर वह अपने मंसूबों को अंजाम दे सके। इसके बाद भी उसे अभयदान दान देने वाले देश नहीं चेते।



इसके बाद उत्तर कोरिया के भस्मासुर बनने का सिलसिला तेजी से जारी रहा। 9 अक्टूबर 2006 को उत्तर कोरिया ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया जो एक किलोटन से भी कम का था। फिर 25 मई 2009 को उत्तर कोरिया ने दूसरा परमाणु परीक्षण किया जो 2-7 किलोटन का था। 11 फरवरी 2013 को उत्तर कोरिया ने तीसरा परमाणु परीक्षण किया, जिसको पूरी तरह से सफल करार दिया गया था। 6 जनवरी 2016 चौथा परमाणु परीक्षण किया। इसके एक माह बाद ही उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन बम का भी परीक्षण कर  डाला था। 9 सितंबर 2016 को उसने पांचवां परमाणु प‍रीक्षण किया जिसको 6-9 किलोटन का बताया गया था। ऐसे में उत्तर कोरिया के पास मौजूद परमाणु हथियारों के जखीरे की बस कल्पना  ही की जा सकती है।



अब यह भस्मासुर बेकाबू होने को बेकरार है। चीन ने  कुछ दफे इसे  अमेरिका से तनाव बढ़ाने से बचने का आह्वान करता रहता है। चीन की सरकारी मीडिया ने नया परमाणु परीक्षण करने की स्थिति में उत्तर कोरिया पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की थी और उत्तर कोरिया से अनुरोध किया था कि वह इस समय गलतियां करने से बचे। लेकिन भस्मासुर बने उत्तर कोरिया से उसे टका सा जवाब मिला  कि कोई भी चीज उत्तर कोरिया के संकल्प को नहीं हिला सकती। उत्तर कोरिया का कहना है कि दक्षिण कोरिया के खतरे को देखते हुए वह अपने परमाणु कार्यक्रम को खतरे में डालकर चीन के साथ दोस्ती रखने की भीख नहीं मांगेगा। परमाणु कार्यक्रम उसकी अपनी जिंदगी के समान ही कीमती है। मायने साफ है, भस्मासुर किसी भी वक्त अपना रंग दिखा सकता है।