हमारे किसान, हमारे भगवान

मीडिया भी कई बार बहुत बेरहम हो जाता है। टीआरपी की वजह से कई बार खबरों की प्रथमिकताएं बदल जाती है। अब तमिलनाडु के किसानों की ही बात को लीजिए, बेचारे पिछले 28 दिनों से दिल्ली में धरने पर बैठे हैं। लेकिन मीडिया को योगी और मोदी से फुर्सत नहीं। यब सच है कि योगी को दिखाकर कर कई चैनलों की टीआरपी रेटिंग में जबरदस्त उछाल आई है । लेकिन खबरों की प्राथमिकता में सिर्फ टीआरपी की ही नहीं होनी चाहिए, मीडिया मित्रों।

देश के अन्य भागों की ही तरह तमिलनाडु में भी किसान परेशान हैं। तमिलनाडु के किसान इन दिनों भयंकर सूखे का सामना कर रहे है। दक्षिण-पश्चिमी मानसून और पूर्वोत्तर मानसून सामान्य से 60 फीसदी बरसा है। ऐसे में कर्ज का बोझ उनकी जिंदगी को और कठिन बना रहा है। कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की लगातार हो रही मौतों की गूंज अब दिल्ली में भी सुनाई देने लगी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर तमिलनाडु के कई जिलों से आए किसान नरमुंड के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। हरे रंग की लुंगी पहने तमिलनाडु के इन किसानों के विरोध करने के तौर-तरीके अनायास ही ध्यान खींच लेते हैं। जंतर-मंतर पर आने-जाने वाला हर शख्स किसानों के इस विरोध प्रदर्शन का सहभागी बन रहा है।  किसानों की मांग है कि सरकार उनका कर्जा माफ करे और तमिलनाडु को एक विशेष राहत पैकेज देने की घोषणा करे। लगभग 100 की संख्या में आए किसानों ने केंद्र सरकार से 40 हजार करोड़ रुपए का सूखा राहत पैकेज देने की मांग की है। जंतर-मंतर पर धरना दे रहे किसानों का कहना है कि बैंकों और स्थानीय कर्जदाताओं की प्रताड़ना से तंग आकर तमिलनाडु के किसान अब आत्महत्या करने को विवश हो गए हैं। पिछले कुछ महीनों में लगभग 300 किसानों की मौत हो गई है। यह काफी बड़ा आंकड़ा है। हम एक भी अन्नदाता को खो दें यह हमारे लिए शर्म की बात होनी चाहिए।

भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी तमिलनाडु के किसानों की लगातार हो रही मौतों पर चिंता जाहिर करते हुए तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया है। हालांकि प्रदर्शन कर रहे कई किसानों पास ज्यादा खेत नहीं हैं। उनमें से ज्यादातर किसानों को अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। उनकी अहम मांग है कि किसानों का कर्ज माफ किया जाए। सरकार मामले की गंभीरता को समझते हुए राहत पैकेज देने का ऐलान करे।’ हाल ही में तमिलानाडु के नए सीएम ई पलानीसामी ने 2 हजार 247 करोड़ रुपए का सूखा राहत पैकेज देने की घोषणा की है। जिसको किसान उंट के मुंह में जीरा जैसी स्थिति बता रहे हैं।

आज किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने के लिए पीएमओ पहुंचा था। दिल्ली पुलिस उन्हें इस काम के लिए खुद जंतर-मंतर से लाई थी। हालांकि पीएम दफ्तर में मौजूद नहीं थे। ऐसे में एक हताश किसान अचानक अपने कपड़े उतार निर्वस्त्र होकर सड़क पर दौड़ने लगा। इसी तरह उसके तीन अन्य साथी भी कपड़े उतारकर नॉर्थ ब्लॉक की सड़कों पर उतर आए। ठीक पीएमओ के बाहर अफरा तफरी मच गई।

जंतर-मंतर पर किसानों के समर्थन में कई नेता और दक्षिण भारतीय सिनेमा के सितारे पहुंचे हैं। राहुल गांधी के अलावा मणिशंकर अय्यर और डीएमके सांसद कनिमोझी किसानों से मिल चुकी हैं। भारतीय किसान यूनियन ने भी इस आंदोलन के समर्थन का ऐलान किया है। मद्रास हाईकोर्ट ने भी तमिलनाडु सरकार को किसानों का कर्ज माफ करने का निर्देश दिया है। मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि को-ऑपरेटिव बैंक से किसानों ने जो कर्ज लिए हैं उन्हें माफ किया जाए। अभी तक पांच एकड़ से कम जमीन की जो शर्तें रखीं गईं थी उसे कोर्ट ने खत्म करने को कहा है। इसके अलावा मद्रास हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि कि जो किसान, कर्ज चुकता नहीं कर पाए हैं उनके साथ कोई सख्ती नहीं हो। इस आदेश से तीन लाख किसानों को फायदा होगा।



उम्मीद है कि जल्द ही देश के करोड़ों अन्नदाताओं की छोटी  बड़ी सारी समस्याओं का हल निकलेगा। भारतमाता ग्रामवासिनी..कहते तो हैं लेकिन ग्रामवासी ही सुखी नहीं रहेंगे तो भारतमाता कैसे सुखी रहेगी।