कभी सोचा है ... देश में आजादी के बाद से हम चैन की नींद सोते हैं , तो उसकी वजह, महज हमें 1947 में मिली आजादी ही नहीं है। सरहद पर तैनात जवानों की मुस्तैदी के चलते ही देशवासी चैन की नींद ले पाते हैं। सीमा पर दुर्गम इलाकों में विपरीत हालात में तैनात जवानों की सुविधाओं के लिए सरकार दिल खोल कर खजाना खर्च करती है। लेकिन हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल हुए जवानों के वीडियो ने उन्हें मिलने वाली सुविधाओं पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। पिछले दिनों अपने अधिकारियों के खिलाफ जवानों ने आवाज उठानी शुरू की। लांस नायक यज्ञ प्रताप सिंह ने अधिकारियों पर आरोप लगाए थे कि सेना के अफसर जवानों से जूते साफ कराते हैं। बताया जा रहा है कि इस लांस नायक ने सम्मान की लड़ाई के लिए भूख हड़ताल का रास्ता चुना है। जवान के भूख हड़ताल पर जाने जैसी बात चिंता पैदा करने वाली है। इससे पहले बीएसएफ के जवान तेज बहादुर ने खराब खाने का वीडियो पोस्ट करते हुए बताया था कि कैसे अफसर जवानों के अच्छे राशन को बाजार में बेच दिया करते हैं। सवाल है ऐसा क्या रास्ता हो जिससे ऐसी शिकायत की नौबत ही ना आए।
बात यह है कि हमारी सेना का मनोबल हमेशा उच्च कोटि का रहा है। आजकल नौजवानों में जो बेचैनी है उसके कुछ अंश सेना में भी पहुंच चुके हैं और ये ऐसी बातों को उछालकर ख्याति प्राप्त करना चाहते हैं जिससे की इन पर लोगों का ध्यान आकर्षित हो। सेना का अधिकारी सहायक का कोई भी दुरुपयोग नहीं करता है। हमारे कुछ भौतिक अधिकार इसलिए निरस्त किया गया है क्यों कि हमारी सबसे बड़ी संपदा मनोबल है। आमतौर पर जवानों की देख-रेख बहुत ही अच्छी होती है। लेकिन समय के साथ संवादहीनता में कमी आयी है। इसमें सबसे बड़ी खामी नेतृत्व की हैं। अगर नेतृत्व ठीक होता तो वो इस बात को पहले ही भाप जाता।
ऐसे में एक बात यह भी ध्यान में रखने वाली है कि सोशल मीडिया का प्रयोग करने में जितनी संभावना उपयोग की है उतनी ही दुरुपयोग की भी संभावनायें है। अगर अंसतोष है तो निश्चित तौर पर उस पर मंथन होना चाहिए। अगर इस तरह के वीडियो सामने नहीं आते तब भी ये सवाल चिंता का विषय है। जनरल रावत का बयान बिल्कुल ठीक है। सीमा पर तैनात किसी भी सिपाही को सेल्फी लेकर अपने परिवार वालों के पास भेजने की अनुमति नही दे सकतें। एक अनुशासन है उसको बरकार रखना होगा। लेकिन हमें संवेदनशीलता में अनुशासन का भी ध्यान रखना होगा। कोई भी जवान अगर इस तरह की हिम्मत कर वीडियो वायरल करता है तो उसको अच्छी तरह से पता है कि उसकी नौकरी नही बचने वाली है। निश्चित तौर पर वो इतना परेशान होगा कि इस तरह का वीडियो वायरल कर रहा है। उसकी आंतरिक जांच बहुत जरुरी है और उसकी दिक्कतों को ध्यान देना होगा। ढ़ाई साल में जिस तरह से सेना के अंदर सियासत प्रवेश की है उसको भी हमें देखना होगा और अगर ये सियासत का मसला है तो इसको और तेजी से हल करना होगा।
अगर ये पूरी तरह से झूठ और मनगढ़ंत होता है तो यह और जरुरी है कि अनुशासन में सबको रहना होगा। जिस विभाग में आप हैं वहां के अनुशासन के बाहर आप जायेंगे तो कार्यवाही भी होगी और अगर समस्या है तो उसका समाधान भी होगा।
बात यह है कि हमारी सेना का मनोबल हमेशा उच्च कोटि का रहा है। आजकल नौजवानों में जो बेचैनी है उसके कुछ अंश सेना में भी पहुंच चुके हैं और ये ऐसी बातों को उछालकर ख्याति प्राप्त करना चाहते हैं जिससे की इन पर लोगों का ध्यान आकर्षित हो। सेना का अधिकारी सहायक का कोई भी दुरुपयोग नहीं करता है। हमारे कुछ भौतिक अधिकार इसलिए निरस्त किया गया है क्यों कि हमारी सबसे बड़ी संपदा मनोबल है। आमतौर पर जवानों की देख-रेख बहुत ही अच्छी होती है। लेकिन समय के साथ संवादहीनता में कमी आयी है। इसमें सबसे बड़ी खामी नेतृत्व की हैं। अगर नेतृत्व ठीक होता तो वो इस बात को पहले ही भाप जाता।
ऐसे में एक बात यह भी ध्यान में रखने वाली है कि सोशल मीडिया का प्रयोग करने में जितनी संभावना उपयोग की है उतनी ही दुरुपयोग की भी संभावनायें है। अगर अंसतोष है तो निश्चित तौर पर उस पर मंथन होना चाहिए। अगर इस तरह के वीडियो सामने नहीं आते तब भी ये सवाल चिंता का विषय है। जनरल रावत का बयान बिल्कुल ठीक है। सीमा पर तैनात किसी भी सिपाही को सेल्फी लेकर अपने परिवार वालों के पास भेजने की अनुमति नही दे सकतें। एक अनुशासन है उसको बरकार रखना होगा। लेकिन हमें संवेदनशीलता में अनुशासन का भी ध्यान रखना होगा। कोई भी जवान अगर इस तरह की हिम्मत कर वीडियो वायरल करता है तो उसको अच्छी तरह से पता है कि उसकी नौकरी नही बचने वाली है। निश्चित तौर पर वो इतना परेशान होगा कि इस तरह का वीडियो वायरल कर रहा है। उसकी आंतरिक जांच बहुत जरुरी है और उसकी दिक्कतों को ध्यान देना होगा। ढ़ाई साल में जिस तरह से सेना के अंदर सियासत प्रवेश की है उसको भी हमें देखना होगा और अगर ये सियासत का मसला है तो इसको और तेजी से हल करना होगा।
अगर ये पूरी तरह से झूठ और मनगढ़ंत होता है तो यह और जरुरी है कि अनुशासन में सबको रहना होगा। जिस विभाग में आप हैं वहां के अनुशासन के बाहर आप जायेंगे तो कार्यवाही भी होगी और अगर समस्या है तो उसका समाधान भी होगा।
